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रोहिंग्या मुस्लिमों को एक साथ बांध उतारा मौत के घाट, एक ही कब्र में दफनाया

dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 10,2018 1:03 PM IST
  • रोहिंग्या मुस्लिमों को एक साथ बांध उतारा मौत के घाट, एक ही कब्र में दफनाया
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रखाइन. म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर हुए अत्याचार की एक और घटना सामने आई हैं। यहां बीते साल सितंबर में एक साथ दस रोहिंग्या मुस्लिमों को बांधकर हत्या कर दी गई थी और बाग में इन्हें एक ही कब्र में दफना दिया गया था। इनमें से दो को गांव की बौद्धों ने मारा था, जबकि बाकी का मर्डर सेना के जवानों ने किया था। रोंगटे खड़ कर देने वाली इस घटना की रिपोर्ट अब जाकर सामने आ पाई है, क्योंकि इसे कवर कर रहे न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के दो जर्नलिस्ट्स को भी म्यांमार सेनाने अरेस्ट कर लिया गया था। बौद्धों ने मानी मर्डर में शामिल होने की बात...

 

- रॉयटर्स ने म्यांमार के रखाइन स्टेट में रोहिंग्या मुस्लिमों पर हुए अत्याचार की ये रिपोर्ट अब जारी की है। न्यूज एजेंसी ने उन 10 पीड़ितों की फोटोज भी जारी की है, जिन्हें मौत के घाट उतारा गया। 
- एजेंसी का कहना है कि अब तक रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर जितनी भी खबरें लगीं, वो सिर्फ पीड़ितों के बयान और बातचीत के आधार पर थी। पहली बार इस हत्या में शामिल बौद्धों और सेना के जवानों से बातचीत की गई है। 
- इन सभी ने रोहिंग्या के खिलाफ हत्या में शामिल होने के साथ खुद गड्ढे खोदकर दफनाने तक के काम में हाथ होने की बात मानी है।
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रखाइन स्टेट के गांव में जिन दस रोहिंग्या को फौज ने पकड़ा था, उनमें से कम से कम दो को काट दिया गया था, जबकि बाकियों को सोल्जर्स ने गोली मार कर मौत के नींद सुला दिया। 

 

रिटायर्ड बौद्ध सोल्जर ने बताया आंखों देखा हाल
- बौद्ध समुदाय के एक 55 वर्षीय रिटायर्ड सोल्जर ने रॉयटर्स से कहा, '‘एक कब्र में 10 रोहिंग्या को दफनाया गया। उन्होंने मर्डर होते देखा और गड्ढा खोदने में मदद की।''
- रिटायर्ड सोल्जर के मुताबिक, ''हर व्यक्ति को दो से तीन बार गोली मारी। यहां तक कि कई ऐसे रोहिंग्या को भी दफनाया जा रहा था जो कि आवाज कर रहे थे। जबकि बाकी मर चुके थे।’'

 

मर्डर में बौद्ध भी शामिल
- अब तक पीड़ितों के हवाले से ही रोहिंग्या पर अत्याचार की खबरें सामने आईं, मगर रॉयटर्स ने पहली बार हत्या में शामिल बौद्धों का इंटरव्यू लेकर उनके अत्याचार में शामिल होने की बात का भी खुलासा किया है। इन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों के घर जलाने की बात खुद मानी हैं।

 

फौज के इशारे पर हुआ सबकुछ 
- पहली बार इस नरसंहार में मीडिया के लेवल से फौज की भूमिका की भी जांच हुई। हालांकि, घटना को लेकर मिलिट्री का वर्जन रॉयटर्स को रखाइन में मिले बौद्ध और रोहिंग्या मुस्लिम चश्मदीदों के अकाउंट से बिल्कुल अलग है।
- मिलिट्री ने कहा कि मारे गए सभी 10 रोहिंग्या उन 200 आतंकियों के ग्रुप से थे, जिन्होंने सिक्युरिटी फोर्सेज पर हमला किया था। जबकि गांव के बौद्धों ने ऐसे किसी भी हमले से इनकार किया है। 
- इस मामले में खुलासा हुआ है कि पूरा कैंपेन फौज के इशारे पर ही चला। मारे गए लोगों की फैमिली अब बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रही हैं। 
- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की तस्वीरों की इन फैमिली ने मारे गए सदस्य की पहचान की। जिन युवकों की हत्या हुई, वे मछुआरे, दुकानदार, रिलीजियस टीचर और दो किशोर स्टूडेंट रहे। 

 

6 लाख से ज्यादा ने छोड़ा देश
म्यांमार से अब तक करीब छह लाख 90 हजार रोहिंग्या मुसलमान गांव छोड़कर बांग्लादेश चले गए। रोहिंग्या मुसलमानों ने फौज पर आगजनी, रेप और मर्डर का आरोप लगाया। यूनाइटेड नेशन ने भी नरसंहार की आशंका जताई। बता दें कि अमेरिका ने इसे जातीय सफाई करार दिया, वहीं म्यांमार ने इसे क्लीयरेंस ऑपरेशन बताते हुए रोहिंग्या विद्रोहिया के हमलों की वाजिब रिएक्शन करार दिया है। 

 

ऐसा है रोहिंग्या मुस्लिमों का हाल
रिपोर्ट के मुताबिक रखाइन स्टेट में सदियों से रोहिंग्या मुस्लिमों की मौजूदगी रही है। हालांकि, ज्यादातर म्यांमर के लोग उन्हें बांग्लादेश से आए अवांक्षित अप्रवासी मानते हैं। रोहिंग्या को म्यांमर की फौज बंगाली को तौर पर देखती है। हाल के दिनों में सांप्रदायिक तनाव बढ़े हैं और सरकार ने एक लाख से ज्यादा रोहिंग्या को कैंपों तक सीमित कर दिया है। जहां उनके पास खाना, मेडिकल और शिक्षा तक सीमित पहुंच है।

 

कैसे शुरू हुआ अत्याचार
म्यांमार बौद्ध बहुल आबादी वाला देश है। यहां कभी दस लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान भी रहते हैं। म्यांमार के रखाइन राज्य में 2012 से बौद्धों और रोहिंग्या विद्रोहियों के बीच सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत हुई। पिछले साल हालात तब भयावह हो गए, जब म्यांमार में मौंगडो बॉर्डर पर रोहिंग्या विद्रोहियों के हमले में नौ पुलिस अफसरों की मौत हो गई और फिर मिलिट्री ने दमन शुरू किया। मिलिट्री के साथ बौद्धों ने भी हमला बोल दिया। इस हमले में हजारों रोहिंग्या हिंसा की भेंट चढ़ गए। इसके बाद से ये तनाव बढ़ता ही जा रहा और रोहिंग्या मुस्लिम देश छोड़ने को मजबूर हैं। भले ही सदियों से रोहिंग्या म्यांमार में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थानीय बौद्ध अवैध घुसपैठिया ही मानते हैं।

 

आगे की स्लाइड्स में देखें इस घटना से जुड़ी फोटोज...

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रेहाना खातून के पति मोबहम्मद नूर भी उन 10 रोहिंग्या मुस्लिमों में शामिल हैं, जिन्हें सितंबर में सेना और गांव के बौद्धों ने मौत की नींद सुला दिया था।
रेहाना खातून के पति मोबहम्मद नूर भी उन 10 रोहिंग्या मुस्लिमों में शामिल हैं, जिन्हें सितंबर में सेना और गांव के बौद्धों ने मौत की नींद सुला दिया था।
रेहाना खातून के पति मोबहम्मद नूर भी उन 10 रोहिंग्या मुस्लिमों में शामिल हैं, जिन्हें सितंबर में सेना और गांव के बौद्धों ने मौत की नींद सुला दिया था।
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रॉयटर्स ने वहां बौद्धों के जरिए इनकी फोटोज हासिल की हैं।
रॉयटर्स ने वहां बौद्धों के जरिए इनकी फोटोज हासिल की हैं।
रॉयटर्स ने वहां बौद्धों के जरिए इनकी फोटोज हासिल की हैं।
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2 सितंबर को मारे गए 10 रोहिंग्या मुस्लिमों में 30 साल की शूना खातू के भी पति थे।
2 सितंबर को मारे गए 10 रोहिंग्या मुस्लिमों में 30 साल की शूना खातू के भी पति थे।
2 सितंबर को मारे गए 10 रोहिंग्या मुस्लिमों में 30 साल की शूना खातू के भी पति थे।
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अब्दू शकूर ने सेना और बौद्धों के इस हमले में अपने बेटे राशिद अहमद को खोया था।
अब्दू शकूर ने सेना और बौद्धों के इस हमले में अपने बेटे राशिद अहमद को खोया था।
अब्दू शकूर ने सेना और बौद्धों के इस हमले में अपने बेटे राशिद अहमद को खोया था।
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रखाइन स्टेट में यहां रोहिंग्या मुस्लिमों के घर हुआ करते थे, जिन्हें जला दिया गया।
रखाइन स्टेट में यहां रोहिंग्या मुस्लिमों के घर हुआ करते थे, जिन्हें जला दिया गया।
रखाइन स्टेट में यहां रोहिंग्या मुस्लिमों के घर हुआ करते थे, जिन्हें जला दिया गया।
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24 साल की हसीना खातून ने अपने पति अब्दुल हाशिम को इस हमले में खो दिया था।
24 साल की हसीना खातून ने अपने पति अब्दुल हाशिम को इस हमले में खो दिया था।
24 साल की हसीना खातून ने अपने पति अब्दुल हाशिम को इस हमले में खो दिया था।

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