Slavery practice still shackles Mauritania the African country- Dainik Bhaskar
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दुनिया का आखिरी देश, जहां आज भी 6 लाख लोग जी रहे गुलामों की जिंदगी

dainikbhaskar.com | Nov 29,2016 12:10 AM IST
  • दुनिया का आखिरी देश, जहां आज भी 6 लाख लोग जी रहे गुलामों की जिंदगी
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इंटरनेशनल डेस्क. अफ्रीकी देश मॉरिटानिया अपना इन्डिपेन्डेंस डे मना रहा है। देश को फ्रांस से आजाद हुए करीब 5 दशक से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन इतने वक्त बाद भी गुलामी यहां अब भी जिंदा है। यहां अब भी करीब छह लाख लोग गुलामों की जिंदगी जी रहे हैं। इन्हें भूखे रखकर काम कराया जाता है। गुलाम महिलाओं और बच्चियों को मालिक रेप का शिकार बनाता है।  लगाने वाला कानून भी बेअसर...
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यहां रहने वाले अब्देल नासिर(फोटो में)को 7 साल की उम्र अपना पहला गुलाम मिला था। हालांकि,इन्होंने जब ये 16 साल के हुए,तो उन्होंने अपने गुलाम को आजाद कर दिया।
यहां रहने वाले अब्देल नासिर(फोटो में)को 7 साल की उम्र अपना पहला गुलाम मिला था। हालांकि,इन्होंने जब ये 16 साल के हुए,तो उन्होंने अपने गुलाम को आजाद कर दिया।
यहां रहने वाले अब्देल नासिर (फोटो में) को 7 साल की उम्र अपना पहला गुलाम मिला था। हालांकि, इन्होंने जब ये 16 साल के हुए, तो उन्होंने अपने गुलाम को आजाद कर दिया।
पैसों के बदले नहीं, तोहफे में दिए जाते हैं गुलाम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां मास्टर अपने गुलामों की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्हें बेचा या खरीदा नहीं जाता है, बल्कि शादियों में इन्हें गिफ्ट किया जाता है। यहां पर गुलामी की जिंदगी जी रहे ज्यादातर परिवार यहां के पारंपरिक अश्वेत हैं। इन्हें सदियों पहले यहां आए अरब के लोगों ने गुलाम बना लिया था। अब गुलाम परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी गुलाम की ही जिंदगी जी रहे हैं, जबकि अरब मालिक बनकर उन पर जुल्म ढा रहे हैं।  
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बचपन से ही मास्टर आएदिन करता रेप
गुलाम बनाकर रखी गई मॉलखैर मिन्ट यार्बा ने बहुत ही तकलीत और दहशत से भरी जिंदगी जी। वो गुलाम की बेटी थी, इसलिए अपने आप अपने मास्टर की गुलाम बन गईं। बचपन में ही उसे अपने मां-बाप से अलग कर दिया गया। उसे भेड़ और ऊंट के साथ रखा गया। छोटी सी उम्र में ही उसका मास्टर उससे आएदिन रेप करता। मॉलखैर ने बताया था कि उसके सभी बच्चे गुलामी में ही पैदा हुए और सभी उसके मास्टर के रेप का नतीजा थे। उसके मास्टर ने उसके एक बच्चे को उसके सामने ही मार डाला था। क्योंकि बच्चे को पीठ पर लादकर वो पहले की तरह तेज काम नहीं कर पा रही थी।  
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मास्टर के शोषण का शिकार टीनेजर्स बन रहीं मां
यूनाइटेड नेशन के 2012 के सर्वे के मुताबिक, देश में पैदा होने वाले 1000 बच्चों में 72 के करीब उन टीनेजर लड़कियों के होते हैं। जिन्हें अपने मास्टर द्वारा रेप का शिकार बनाया गया होता है। वो इस प्रेग्नेंसी के दौरान सिर्फ शारीरिक तौर पर ही नहीं मेंटल तौर पर भी शोषण का शिकार हुई रहती हैं।
 
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लोगों के दिमाग में बस चुकी है गुलामी 
यहां गुलामी का रूप सिर्फ शरीरिक श्रम के तौर पर नहीं है। जहां गुलाम चेन और रस्सियों में बांधकर रखे जाते हों। यहां गुलामी लोगों के दिमाग में बस चुकी है और जिंदगी का हिस्सा बन गई है। गुलामी का विरोध करने वाला ग्रुप के लीडर के मुताबिक, गुलामी कई पीढ़ियों से चली आ रही है। ऐसे में गुलामों ने भी अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लिया है। उनका मानना है कि अगर वो अपने मास्टर का साथ देंगे तो उन्हें जन्नत नसीब होगी। 
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सरकार का कानून भी बेअसर
देश में कानून पास होने के बाद भी गुलामी पूरे अस्तित्व में है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यहां की राजनीतिक सोच है। देश की सरकार ने कानून तो पास किया, लेकिन लोगों को इसका फायदा नहीं मिल रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में गुलामों की ये हालत होने के बाद सरकार ये मानने को राजी ही नहीं है कि देश में गुलामी जैसी कोई चीज अस्तित्व में है। इसके अलावा गरीबी, रंग का भेदभाव और एजुकेशन की कमी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार हैं। 

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