Temple situated in Katas village of Chakwal district of Punjab- Dainik Bhaskar
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पाकिस्तान में है यह ऐतिहासिक मंदिर, शिवजी के आंसुओं से बना था कुंड

dainikbhaskar.com | Jan 13,2017 11:03 AM IST
  • पाकिस्तान में है यह ऐतिहासिक मंदिर, शिवजी के आंसुओं से बना था कुंड
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इंटरनेशनल डेस्क. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बुधवार को पंजाब प्रांत में स्थित ऐतिहासिक कटासराज मंदिर का दौरा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जल्द ही अल्पसंख्यकों के अनुकूल देश के तौर पर देखा जाएगा। शरीफ ने मंदिर के पुनरुद्धार का भी आदेश दिया है। भगवान श्रीकृष्ण ने करवाया था मंदिर का निर्माण...
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चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है ‘कटासराज’ मंदिर।
चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है ‘कटासराज’ मंदिर।
चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है ‘कटासराज’ मंदिर।
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भगवान शिव का यह मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।
भगवान शिव का यह मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।
भगवान शिव का यह मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।
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मंदिर परिसर से लगा हुआ एक साफ पानी का एक कुंड भी है, जिसमें पानी का रंग दो तरह का है।
मंदिर परिसर से लगा हुआ एक साफ पानी का एक कुंड भी है, जिसमें पानी का रंग दो तरह का है।
मंदिर परिसर से लगा हुआ एक साफ पानी का एक कुंड भी है, जिसमें पानी का रंग दो तरह का है।
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कम गहराई वाले स्थान में पानी का रंग हरा तथा अधिक गहरे स्थान वाली जगह पर पानी का रंग नीला है।
कम गहराई वाले स्थान में पानी का रंग हरा तथा अधिक गहरे स्थान वाली जगह पर पानी का रंग नीला है।
कम गहराई वाले स्थान में पानी का रंग हरा तथा अधिक गहरे स्थान वाली जगह पर पानी का रंग नीला है।
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मान्यता है कि हजारों साल पहले इस मंदिर का निर्माण खुद भगवान श्रीकृष्ण ने करवाया था।
मान्यता है कि हजारों साल पहले इस मंदिर का निर्माण खुद भगवान श्रीकृष्ण ने करवाया था।
मान्यता है कि हजारों साल पहले इस मंदिर का निर्माण खुद भगवान श्रीकृष्ण ने करवाया था।
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कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पानी की खोज में पांडव इस जगह पहुंचे थे।
कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पानी की खोज में पांडव इस जगह पहुंचे थे।
कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पानी की खोज में पांडव इस जगह पहुंचे थे।
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मंदिर के कुंड पर यक्ष का अधिकार था। पानी की तलाश में सबसे पहले नकुल कुंड के पास आए थे।
मंदिर के कुंड पर यक्ष का अधिकार था। पानी की तलाश में सबसे पहले नकुल कुंड के पास आए थे।
मंदिर के कुंड पर यक्ष का अधिकार था। पानी की तलाश में सबसे पहले नकुल कुंड के पास आए थे।
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जब वे पानी पीने लगे तो यक्ष ने कहा पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो। नकुल उनके सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
जब वे पानी पीने लगे तो यक्ष ने कहा पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो। नकुल उनके सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
जब वे पानी पीने लगे तो यक्ष ने कहा पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो। नकुल उनके सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
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नकुल ने जबर्दस्ती पानी पीने की कोशिश की तो वे बेहोश हो गए। यही हाल बाकी अन्य तीनों भाईयों का हुआ था।
नकुल ने जबर्दस्ती पानी पीने की कोशिश की तो वे बेहोश हो गए। यही हाल बाकी अन्य तीनों भाईयों का हुआ था।
नकुल ने जबर्दस्ती पानी पीने की कोशिश की तो वे बेहोश हो गए। यही हाल बाकी अन्य तीनों भाईयों का हुआ था।
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यक्ष ने पांडवों से धर्म और जीवन से संबंधित सवाल पूछे था, जिसका जवाब सिर्फ धर्मराज युधिष्ठिर ही दे पाए थे।
यक्ष ने पांडवों से धर्म और जीवन से संबंधित सवाल पूछे था, जिसका जवाब सिर्फ धर्मराज युधिष्ठिर ही दे पाए थे।
यक्ष ने पांडवों से धर्म और जीवन से संबंधित सवाल पूछे था, जिसका जवाब सिर्फ धर्मराज युधिष्ठिर ही दे पाए थे।
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पांडवों ने यहां छिपकर रहने के लिए 7 महल बनवाए थे। इसके बाद पांडवों ने यहां करीब 4 साल का वक्त गुजारा।
पांडवों ने यहां छिपकर रहने के लिए 7 महल बनवाए थे। इसके बाद पांडवों ने यहां करीब 4 साल का वक्त गुजारा।
पांडवों ने यहां छिपकर रहने के लिए 7 महल बनवाए थे। इसके बाद पांडवों ने यहां करीब 4 साल का वक्त गुजारा।
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माता सती के वियोग में भगवान शिव की आंखों से दो आंसू धरती पर गिरे थे।
माता सती के वियोग में भगवान शिव की आंखों से दो आंसू धरती पर गिरे थे।
माता सती के वियोग में भगवान शिव की आंखों से दो आंसू धरती पर गिरे थे।
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इनमें से एक पुष्कर (राजस्थान) में और दूसरा कटासराज मंदिर में गिरा था।
इनमें से एक पुष्कर (राजस्थान) में और दूसरा कटासराज मंदिर में गिरा था।
इनमें से एक पुष्कर (राजस्थान) में और दूसरा कटासराज मंदिर में गिरा था।
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कटासराज परिसर में अब भी तालाब के चारों ओर बौद्ध स्तूप भी हैं।
कटासराज परिसर में अब भी तालाब के चारों ओर बौद्ध स्तूप भी हैं।
कटासराज परिसर में अब भी तालाब के चारों ओर बौद्ध स्तूप भी हैं।
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इसके अलावा कुछ मध्यकालीन मंदिरों और पुरानी हवेलियों के अवशेष हैं।
इसके अलावा कुछ मध्यकालीन मंदिरों और पुरानी हवेलियों के अवशेष हैं।
इसके अलावा कुछ मध्यकालीन मंदिरों और पुरानी हवेलियों के अवशेष हैं।
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मंदिर के साथ लगे बौद्ध स्तूप तथा सिख हवेलियां अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र हैं।
मंदिर के साथ लगे बौद्ध स्तूप तथा सिख हवेलियां अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र हैं।
मंदिर के साथ लगे बौद्ध स्तूप तथा सिख हवेलियां अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र हैं।
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चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित ‘कटासराज’ मंदिर।
चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित ‘कटासराज’ मंदिर।

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