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सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक से इनकार, भाजपा के सरकार बनाने के न्योते के खिलाफ सुनवाई कल

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 17,2018 7:01 AM IST
  • सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक से इनकार, भाजपा के सरकार बनाने के न्योते के खिलाफ सुनवाई कल
  • सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक से इनकार, भाजपा के सरकार बनाने के न्योते के खिलाफ सुनवाई कल
  • सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक से इनकार, भाजपा के सरकार बनाने के न्योते के खिलाफ सुनवाई कल
  • सुप्रीम कोर्ट का येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक से इनकार, भाजपा के सरकार बनाने के न्योते के खिलाफ सुनवाई कल
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-  कांग्रेस-जेडीएस के दावे के 4 घंटे बाद गवर्नर वजूभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था
-  येदियुरप्पा आज सुबह 9 बजे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन मंत्रिमंडल का गठन अभी नहीं
-  याकूब मेनन के फांसी के फैसले के बाद दूसरी बार किसी मामले की सुनवाई करने रात को खुली सुप्रीम कोर्ट

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दिनभर चली सियासी कश्मकश

 

मीटिंग में नहीं पहुंचे जेडीएस के विधायक: बुधवार को जेडीएस की विधायक दल की बैठक में जेडीएस के 2 विधायक राजा वेंकटप्पा और वेंकट राव नहीं पहुंचे।

राज्यपाल से मिले येदियुरप्पा: भाजपा विधायक दल की बैठक में येदियुरप्पा को दल का मुखिया चुना गया। उन्होंने मीटिंग के बाद राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके प्रतिनिधिमंडल में प्रजनवंता पक्ष के विधायक आर शंकर भी दिखाई दिए।

कांग्रेस ने भाजपा विधायकों के समर्थन का दावा किया: कांग्रेस के एमबी पाटिल ने कहा कि भाजपा के 6 विधायक उनके संपर्क में हैं। 

भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगे: जेडीएस चीफ एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि वे लोग (भाजपा नेता) पार्टी के विधायकों को 100-100 करोड़ रुपए  का ऑफर दे रहे हैं। अगर वे हमारे 10 विधायक तोड़ेंगे, तो हम 20 छीन लेंगे। इससे पहले कांग्रेस के एक विधायक अमरेगौड़ा लिंगानागौड़ा पाटिल बाय्यापुर ने कहा कि भाजपा नेताओं ने उन्हें मंत्री पद का ऑफर दिया था। 

 

शाम को राज्यपाल से मिलीं कांग्रेस-जेडीएस

- जेडीएस और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने शाम को राज्यपाल से मुलाकात की। इसके बाद कुमारस्वामी ने कहा कि हमने सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हमने राज्यपाल से कहा कि हमारे पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत है। 

कुमारस्वामी ने कहा- ‘‘कर्नाटक में कोई मोदी लहर नहीं है। भाजपा की अश्वमेध यात्रा उत्तर से शुरू हुई, लेकिन कर्नाटक में हमने उसके घोड़े रोक दिए। ये जनादेश भाजपा की अश्वमेध यात्रा रोकने के लिए है। भूल जाइए कि ऑपरेशन कमल कामयाब होगा।’’

 

भाजपा-कांग्रेस ने लगाए आरोप

 

हमें नसीहत ना दें राहुल-सोनिया- रविशंकर प्रसाद

- रविशंकर प्रसाद ने देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "जब किसी सरकार को बहुमत नहीं है तो किस को सरकार बनाने का मौका मिलेगा? ऐसे में राज्यपाल और राष्ट्रपति दोनों के पास विवेकाधिकार है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बंधन नहीं लगाया, बस इतना कहा है कि ये निर्बाधित नहीं होना चाहिए और उसकी एक मर्यादा होनी चाहिए। दरअसल, कांग्रेस कर्नाटक में सत्ता सुख का लोभ छोड़ नहीं पा रही है, ऐसा क्यों है आप भी समझ रहे हैं। जिस पार्टी ने खुद संविधान तोड़ा, देश में सबसे ज्यादा बार राष्ट्रपति शासन लगाया, वो हमें पाठ पढ़ा रही है। राहुल गांधी तो दो दिन से गायब हैं। राहुल अपनी विरासत की बात बहुत करते हैं। 1989 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ था, तब वीपी सिंह पीएम बने थे। तब राजीव गांधीजी की सीटें वीपी सिंह से ज्यादा थीं। अगर राजीव चाहते तो सरकार का दावा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने कहा कि मैंडेट हमारा नहीं है। क्या राहुल अपने पिता की परंपरा भूल गए? राहुल और सोनिया जब आप हमें देश की परंपरा सिखाती हैं, तब हम आपको परिवार की परंपरा सिखाते हैं। हमें शिक्षा देना बंद करें।”

 

मोदीजी और शाहजी ने प्रजातंत्र की हत्या कर डाली- रणदीप सुरजेवाला

- इन सबसे पहले भाजपा को राज्यपाल के बुलावे के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "जेडीएस-कांग्रेस के पास 117 विधायकों का स्पष्ट बहुमत है। लेकिन, वजूभाई भाजपा के मुखौटे और उनका हुक्म बजाने वाले एक कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे हैं ना कि संविधान की सुरक्षा करने वाले के तौर पर। आज फिर श्री मोदीजी और शाह जी ने ना सिर्फ प्रजातंत्र की हत्या कर डाली। संविधान और कानून को अपने व्यक्तिगत और पार्टी के स्वार्थ के लिए पांव तले रौंद डाला। कर्नाटक की जनता और देश के लोग संविधान और कानून को रौंदने की इस प्रथा को स्वीकार नहीं करेंगे। इसकी सजा भाजपा को, गवर्नर वाला जी को, और भाजपा के बीएस येदियुरप्पा को जनता के जरिए जरूर मिलेगी।"

 

क्या है ऑपरेशन कमल?

- 2008 में भाजपा के पास बहुमत के लिए जरूरी 113 से 3 सीटें कम थीं। तब उसने ‘ऑपरेशन कमल’ चलाकर सरकार बना ली थी।
- कहा जाता है कि तब भाजपा ने दल-बदल कानून से बचने के लिए कांग्रेस के 3 और जेडीएस के 4 विधायकों को इस्तीफा देने के लिए राजी कर लिया था। उन्हें भाजपा के टिकट से दोबारा चुनाव लड़ाया गया। इनमें से 5 विधायक जीत गए। इस तरह भाजपा 110 से बढ़कर 115 सीटों पर पहुंच गई।

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