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ऐसे 10 खतरनाक विमान हादसे, जिन्होंने बदल दी एविएशन की दुनिया

dainikbhaskar.com | Nov 29,2016 12:18 PM IST
इंटरनेशनल डेस्क.ब्राजील की एक फुटबॉल क्लब टीम को लेकर जा रहा प्लेन कोलंबिया में क्रैश हो गया है। इस प्लेन में 72 लोग सवार थे। इस घटना ने हवाई सफर में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि,समय-समय पर हुए ऐसे विमान हादसों ने सुरक्षा के क्षेत्र में आए बदलाव में अहम भूमिकाएं निभाई हैं और एविएशन इंडस्ट्री को भी सुधार का मौका दिया है। यहां हम ऐसे ही 10 विमान हादसों के बारे में बता रहे हैं,जिन्होंने एविएशन की दुनिया ही बदल दी।
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एयर कनाडा फ्लाइट 797 (मैकडोनेल डगलस डीसी-9-32) हादसा
 
2 जून, 1983 को एयर कनाडा फ्लाइट 797 का एक मैकडोनेल डगलस डीसी-9-32 टेक्सास से मॉन्ट्रियल जा रहा था। क्रू मेंबर ने 33,00 फीट की ऊंचाई पर से देखा कि प्लेन के पिछले हिस्से में बने बाथरूम से धुआं निकल रहा है। पालयट ने सिनसिनाटी के एयरपोर्ट में लैंडिंग करवाई। तुरंत इमरजेंसी गेट और अन्य गेट भी खोले गए, लेकिन लोग प्लेन से निकल पाते, इससे पहले ही आग से केबिन में विस्फोट हो गया। घटना के चलते विमान में सवार 46 लोगों में से 32 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, आग लगने के कारण का पता नहीं लग सका।
 
बदलाव: इस घटना के बाद सभी विमानों के बाथरूम में स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक आग बुझाने वाली मशीनें लगाई गईं। वहीं, जेटलाइनर्स की सीटों पर फायरप्रूफ परत लगाई गई। प्लेन के फ्लोर में भी लाइटिंग की व्यवस्था की गई। इससे घने स्मोक से यात्री को बाहर निकलने में परेशानी कम होती है। इस सबका असर ये हुआ कि 1988 के बाद विमानों में ज्यादा सेफ और फायरप्रूफ इंटीरियर तैयार किया जाने लगा।
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टीडब्ल्यूए लॉकहीड सुपर और यूनाइटेड एयरलाइंस डगलस डीसी-7 हादसा

ये हादसा 30 जून, 1956 को हुआ, जब टीडब्ल्यूए लॉकहीड सुपर और यूनाइटेड एयरलाइंस डगलस डीसी-7 आपस में टकराकर ग्रैंड कैनयॉन में बिखर गए थे। टीडब्ल्यूए लॉकहीड सुपर में 6 क्रू मेंबर के साथ 64 यात्री थे और डगलस डीसी-7 में 5 क्रू सदस्यों के साथ 53 यात्री थे। इस हादसे में कुल 128 लोगों की मौत हुई थी। 
 
वजह: दोनों विमान इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स (आईएफआर) से नियंत्रित थे। दोनों के पायलटों ने पहले से तय रूट में बदलाव किया, क्योंकि एयरवेज सीधे कंट्रोलरूम से नियंत्रित नहीं था, जिसके चलते ये हादसा हुआ।
 
बदलाव: इस हादसे की वजह से उस समय 250 मिलियन डॉलर की राशि खर्च करके एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम सुधारा गया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में सुधार के बाद अमेरिका में 47 सालों तक विमानों के आपस में टकराने का कोई हादसा नहीं हुआ। इस हादसे के बाद 1958 में फेडरल एविशएन एजेंसी (अब एडमिनिस्ट्रेशन) की शुरुआत की गई। यह एयर सेफ्टी की जिम्मेदारी संभालती है।
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यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 173 हादसा

28 दिसंबर, 1978 को यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 173 ओरेगन के सब-अर्बन इलाके पोर्टलैंड में क्रैश हो गया। यह विमान पोर्टलैंड के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने वाला था। इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश में प्लेन एयरपोर्ट के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, इसमें आग नहीं लगी। विमान में 185 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। सभी क्रू मेंबर्स समेत 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 यात्री घायल हुए। 
 
वजह: एयरक्राफ्ट के फ्यूल को मॉनीटर करने में कैप्टन की नाकामी के चलते ये हादसा हुआ। एयरक्राफ्ट के दोनों इंजनों से तेल खाली हो गया। फ्यूल की सप्लाई रुकने के कारण लैंडिंग गियर में गड़बड़ी आई और इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश नाकाम रही।
 
बदलाव: इस हादसे के बाद सभी क्रू मेंबर को कॉकपिट ट्रेनिंग देनी शुरू की गई। नया कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट (सीआरएम) अपनाया गया। साथ ही, फ्लाइट के अन्य सदस्यों के लिए भी तकनीकी ट्रेनिंग जरूरी कर दी गई। इन सुधारों के चलते 1989 में आयोवा के सिओक्स सिटी में डीसी-10 की क्रैश लैंडिंग को बचाने में क्रू मेंबर सफल रहे।
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एयरोमेक्सिको फ्लाइट 498 हादसा
 
1956 में ग्रैंड कैनयॉन में हवाई दुघर्टना के बाद एटीसी सिस्टम ने एयरलाइन्स के अलग-अलग रूट बनाए गए थे। इससे हादसे रोकने में बड़ी मदद मिली थी। इसके बावजूद लॉस एंजिलिस में 31 अगस्त, 1986 को एक निजी 4 सीटर पाइपर आर्चर विमान को कंट्रोल रूम का सिस्टम डिटेक्ट नहीं कर पाया। एयरोमैक्सिको डीसी-9 के पायलट ने बड़ी भूल कर दी और लैडिंग करने जा रहे यात्री विमान एलएएक्स से जा टकराया। दोनों प्लेन के टुकड़े आबादी वाले इलाके के 20 किमी के दायरे में बिखर गए। इस हादसे में 82 लोगों की मौत हुई। वजह ये रही कि कंट्रोल रूम का सिस्टम एयरपोर्ट एरिया में आए छोटे विमान को डिटेक्ट नहीं कर पाया।
 
बदलाव: छोटे विमानों को कंट्रोल एरिया में प्रवेश देने के लिए ट्रांसपोंडर्स का इस्तेमाल किया जाने लगा। यह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस विमान की स्थिति और उसकी उड़ान की ऊंचाई का पूरा ब्योरा देती है। साथ ही, विमान कंपनियों को टीसीएस-2 भिड़ंत से बचाने वाला सिस्टम लगाना जरूरी कर दिया गया। ट्रांसपोंडर ऐसी स्थितियों से पायलट को विमान को बचाने के लिए सही निर्देश देते हैं। नजीता ये हुआ कि अमेरिका में ये प्रॉसेस अपनाए जाने के बाद कोई भी छोटा प्लेन किसी एयरलाइनर से नहीं टकराया।
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अलोहा एयरलाइंस, फ्लाइट 243, (बोइंग 737-200, एन 73711) हादसा
 

28 अप्रैल, 1988 को अलोहा एयरलाइंस की फ्लाइट 243 का बोइंग 737 विमान के ढांचे की बड़ी खामी उजागर हुई। हिलो से हवाई के होनोलुलु के लिए उड़ान भरने वाले इस विमान में 24,000 फीट की ऊंचाई पर हादसा हुआ। केबिन का गेट और यात्रियों के ऊपर की छत निकलकर अलग हो गई। प्लेन में 89 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे। मावी द्वीप के कहुलुई एयरपोर्ट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई। राहत की बात ये रही कि हादसे में किसी की मौत नहीं हुई। हादसे का कारण विमान में जरूरी मरम्मत की कमी बताई गई।
 
बदलाव: इस हादसे के बाद एयर कैरियर मेंटेनेंस प्रोग्राम और निगरानी प्रोग्राम शुरू किए गए। साथ ही, इंजीनियरिंग डिजाइन की क्वालिटी और उसके सर्टिफिकेशन के लिए नए मानदंड तय किए गए।
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यूएस एयर फ्लाइट 427, (बोइंग 737) हादसा
 

8 सितंबर, 1994 को अमेरिकी एयर फ्लाइट 427 का बोइंग 737 पिट्सबर्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास पहुंचा। यह 6,000 फीट की ऊंचाई पर था, तभी अचानक रडार लेफ्ट साइड में खिसक गया। प्लेन गोता खाने लगा। क्रू ने इसे कंट्रोल करने की काफी कोशिश की, लेकिन इसे रोका नहीं जा सका। विमान में 132 लोग सवार थे। हादसे में सभी 132 लोग मारे गए। पांच साल की जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचा गया कि एक वॉल्व जाम होने की वजह से रडार सिस्टम अपनी जगह से हट गया और इसके चलते यह हादसा हुआ।
 
बदलाव: बोइंग ने 500 मिलियन डॉलर (3093 करोड़ रुपए) खर्च करके 28,00 जेट विमानों में पुराने रडार के पुर्जे बदलकर नए लगाए। वहीं, इस घटना के बाद विमान हादसे में मारे गए यात्रियों के परिवारों की मदद के लिए एविएशन डिजास्टर फैमिली असिस्टेंस एक्ट पारित किया गया।
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वालूजेट फ्लाइट 572 हादसा
 
11 मई, 1996 को वालू जेट फ्लाइट 572 ने फ्लोरिडा स्टेट की मियामी सिटी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 110 लोगों को लेकर अटलांटा के लिए उड़ान भरी थी। इसके कार्गो कंपार्टमेंट में आग लगने से ये एवरग्लेड्स में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान तकनीकी कारणों से 1 घंटा 4 मिनट की देरी से उड़ान भर सका था। दरअसल, यह 27 साल पुराना प्लेन था। पहली बार इसने 18 अप्रैल, 1969 को उड़ान भरी थी। दो साल से विमान में लगातार खराबी की शिकायतें आ रही थीं। इस हादसे में सभी 110 लोग मारे गए थे और आग को हादसे की वजह माना गया। यह आग केमिकल ऑक्सीजन जेनरेटर्स की वजह से लगी थी। इसे गैरकानूनी तरीके से एयरलाइंस मेंटेनेंस की ठेकेदार कंपनी ने विमान में रखा था। 
 
बदलाव: सभी एयरलाइनर के लिए कार्गो केबिन में आग बुझाने वाले ऑटोमैटिक इक्विपमेंट्स लगाना जरूरी किया गया। वहीं, विमानों में फ्लेमेबल (ज्वलनशील) पदार्थों को ले जाने पर कड़ाई से रोक लगा दी गई।
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टीडब्ल्यूए फ्लाइट 800- बोइंग 747 हादसा
 
17 जुलाई, 1996 को जेएफके इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पेरिस के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन यह अटलांटिक सागर में डूब गया। विमान में 230 लोग सवार थे। हादसे में सभी यात्रियों की मौत हो गई। विमान के मलबे को खोजा नहीं जा सका। तमाम अफवाहों के बीच चार साल की जांच के बाद फ्यूल टैंक में आग लगने की आशंका जताई गई।
 
बदलाव: विमानों में वायरिंग में स्पार्किंग की संभावना को कम किया गया। बोइंग ने एक फ्यूल-एंटरिंग सिस्टम तैयार किया। यह फ्यूल टैंक में नाइट्रोजन गैस पहुंचाता है, जिससे विस्फोट की संभावनाएं कम हो जाती हैं।
 
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स्विसएयर फ्लाइट 111 हादसा 
 

स्विसएयर की फ्लाइट 111 (मैकडोनेल डगल एमडी 11) न्यूयॉर्क से जिनेवा जा रही थी। कॉकपिट से धुआं निकला और चार मिनट बाद पायलट ने विमान को नीचे किया। यह नोवा स्कोटिया से 65 किमी दूर अटलांटिक सागर में जा गिरा। घटना में विमान में सवार सभी 229 यात्रियों की मौत हो गई थी। हादसा कॉकपिट में आग लगने की वजह से हुआ। आग से प्लेन की एंटरटेनमेंट नेटवर्क में स्पार्किंग होने लगी थी।
 
बदलाव: मेयलर इंसुलेशन कंपनी ने 700 मैकडोनेल डगलस जेट की नई वायरिंग लगाई। इसे फायरप्रूफ मेटेरियल के साथ लगाया गया।
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Web Title: Colombia plane crash - Plane Crashes Changed Aviation Industry
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