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अमेरिका पर भारी पड़ा था ये छोटा-सा देश, हर पाबंदी का ऐसे निकाला तोड़

dainikbhaskar.com | Nov 27,2016 2:31 PM IST
इंटरनेशनल डेस्क.क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और अमेरिका के कट्टर दुश्मन फिदेल कास्त्रो का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। कास्त्रो को कम्युनिस्ट क्यूबा का जनक माना जाता है। इन्होंने करीब पांच दशक तक देश का नेतृत्व किया। उनका जन्म 1926 में क्यूबा के फिदेल अलेजांद्रो कास्त्रो परिवार में हुआ था। कास्त्रो पहले पेशे से वकील थे,लेकिन देश के राष्ट्रपति बतिस्ता की तानाशाही से तंग आकर उन्होंने सशस्त्र क्रांति शुरू की और लंबे संघर्ष के बाद बतिस्ता को बेदखल कर सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ली। इसके बाद वे अमेरिका के कट्टर दुश्मन बन गए। अमेरिका ने उन्हें झुकाने की हर कोशिश की,लेकिन कास्त्रो हर बार पूरे देश को मुसीबत से निकाल लाए और अपनी पूरी जिंदगी अमेरिका को आंख दिखाते रहे।
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21 मार्च 2016 में अमेरिकन प्रेसिडेंट बराक ओबामा क्यूबा की यात्रा पर पहुंचे थे। उस समय क्यूबा की राजधानी हवाना में उनके एयरफोर्स 1 प्लेन की ये फोटो क्लिक की गई थी।
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पेट्रोल की किल्लत से इस तरह देश को उबारा
क्यूबा पेट्रोलियम पदार्थ के लिए पूरी तरह से सोवियत यूनियन पर निर्भर था। क्यूबा और सोवियत दोनों ही अमेरिका के दुश्मन नंबर एक थे। इसके चलते सोवियत यूनियन और क्यूबा के बीच अच्छी दोस्ती थी। लेकिन, 1991 में सोवियत यूनियन का विघटन हो गया। सोवियत यूनियन के कई देश अमेरिका के सपोर्टर बन गए और अमेरिका के इशारे पर इन्होंने क्यूबा को पेट्रोल सप्लाई रोक दी। रूस के पास भी इतना पेट्रोल नहीं था कि वह क्यूबा की जरूरत पूरी कर सके। इससे क्यूबा में पेट्रोल की किल्लत हो गई। फिदेल कास्त्रो ने देश की जनता से सपोर्ट मांगा। इसके लिए साइकिल का इस्तेमाल करने को कहा गया। इसके बाद चीन से करीब ढाई लाख साइकिल खरीदी गईं। इसके अलावा बसों और ट्रकों की लंबाई बढ़ा दी गई। पहले जिन बसों में 30 व्यक्ति बैठते थे, अब उसमें 50 बैठने लगे। ग्रामीण इलाकों में बैल, घोड़ों और ऊंट को लगा दिया गया। इससे पूरे देश में पेट्रोल की मांग में भारी कमी आ गई और देश इस समस्या से दो सालों में ही उबर गया।
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हरित क्रांति लाकर पूरे देश को आत्मनिर्भर बनाया
अमेरिका ने क्यूबा पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। वहीं, दुनिया के कई देश भी अमेरिका के ही समर्थन में थे। इसके चलते क्यूबा से कई देशों ने व्यापारिक संबंध तोड़ लिए थे। इससे देश में खाद्य पदार्थो की कमी आ गई। फिदेल कास्त्रो इस समस्या से निपटने के लिए भी तैयार थे। उन्होंने देश में हरित क्रांति लाने का एलान कर दिया। देश के सभी लोगों से अपील की कि वे घर के पास की खाली जमीन का इस्तेमाल सब्जियां और अनाज उगाने में करें। बंजर जमीनों को भी उपजाऊ बनाने की कोशिशें शुरू कर दी गईं। जैविक खेती पर जोर दिया गया। इससे क्यूबा में सब्जियों व अन्य खाद्य पदार्थो का उत्पादन दोगुना हो गया। इस हरित क्रांति का असर यह हुआ कि अब भी क्यूबा में अनाज व सब्जियों का उत्पादन देश की आवश्यकता से तिगुना है।
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कास्त्रो की वजह से टला था तीसरा वर्ल्ड वॉर
साल 1962 में शीत युद्ध के दौरान रूस और अमेरिका फिर से एक-दूसरे के सामने आ गए थे। परमाणु शक्ति में अमेरिका, रूस से कहीं आगे था। इसके चलते अमेरिका ने अपनी कई एटमिक मिसाइल सोवियत यूनियन पर तान दी थीं। वहीं, रूस की मिसाइलों की रेंज पूरे अमेरिका तक नहीं थी। इसलिए रूस ने क्यूबा से मदद मांगी। कास्त्रो ने तुरंत ही सोवियत यूनियन को अपने आइलैंड पर परमाणु मिसाइल तैनात करने की परमिशन दे दी। सोवियत यूनियन ने क्यूबा में जिस जगह अपनी परमाणु मिसाइल तैनात की थीं, वह अमेरिका से सिर्फ 145 किमी दूर था। इससे पूरा अमेरिका, सोवियत यूनियन की एटमिक मिसाइल की जद में आ गया। इस कदम से सभी देश डर गए। पूरी दुनिया मान चुकी थी कि अब तीसरा वर्ल्ड वॉर होने वाला है। लेकिन, सोवियत यूनियन की मिसाइल से अमेरिका डर गया और इस तरह दोनों देशों के बीच अपनी-अपनी एटमिक मिसाइलें हटाने पर सहमति बन गई और तीसरा वर्ल्ड वॉर होते-होते रह गया। सोवियत यूनियन ने इसका पूरा श्रेय फिदेल कास्त्रो को दिया।
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लंबे समय तक किया राज 
फिदेल कास्त्रो ब्रिटेन की महारानी और थाईलैंड के राजा के बाद दुनिया के तीसरे ऐसे राष्ट्राध्यक्ष थे, जिसने सबसे लंबे समय तक राज किया। वे 1959 से 1976 तक प्रधानमंत्री और 1976 से 2008 तक राष्ट्रपति बने रहे।
 
बीमारी ने जब फिदेल को मजबूर कर दिया और वो काम करने की स्थिति में नहीं रहे, तब जुलाई 2008 में उन्होंने अपने भाई के हाथ देश की सत्ता सौंपी। 
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नौ अमेरिकी राष्ट्रपतियों से लंबा राज 
सीआईए की हत्या की साजिश, अमेरिका समर्थित निर्वासन, 45 साल से भी ज्यादा के आर्थिक प्रतिबंध और कहीं आने-जाने की पाबंदियों का सामना करने के बावजूद फिदेल कास्त्रो ने 9 अमेरिकी राष्ट्रपतियों से लंबे समय तक देश पर राज किया। क्यूबा और कास्त्रो को सबसे सख्तियों का सामना जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में करना पड़ा था।
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लंबे भाषण का वर्ल्ड रिकॉर्ड
फिदेल कास्त्रो के नाम एक गिनीज बुक रिकॉर्ड भी दर्ज है। ये रिकॉर्ड उन्होंने भाषण देकर बनाया था। 29 सितंबर 1960 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में 4 घंटे, 29 मिनट का भाषण दिया था। उनका 7 घंटे 10 मिनट का सबसे लंबा भाषण क्यूबा में 1986 में रिकॉर्ड किया गया था। ये भाषण उन्होंने हवाना में कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के कार्यक्रम में दिया था।
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फिदेल कास्त्रो के फेमस कोट्स...
 
- मैं मानता हूं कि मेरी असल नियति वह युद्ध ही होगा जो कि मैं अमेरिका से लड़ने जा रहा हूं।
 
- क्यूबा क्रांति से हुए सबसे बड़े लाभ में एक यह भी है कि आज हमारी वेश्याएं भी कॉलेज ग्रैजुएट हैं।
 
- जरा सोचिये अगर समाजवादी समुदाय खत्म हो जाए, तो दुनिया में क्या होता.. यह भले पहले संभव था, लेकिन मैं नहीं मानता कि अब यह संभव है या नही।
 
- मैं 80 साल का होने पर बहुत खुश हूं. मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था, खासकर एक ऐसे पड़ोसी के होते हुए, जो हर दिन मुझे मारने की कोशिश कर रहा है।
 
- बताया जाता है कि अमेरिका ने कास्त्रो  की हत्या करवाने 600 से अधिक बार कोशिश की, लेकिन असफल रहा। इसी बात पर कास्त्रो ने कहा था.. ‘अगर हमलों से बचने का कोई ओलिंपिक इवेंट होता तो मुझे उसमें गोल्ड मेडल मिलता।’
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क्या थी क्यूबा क्रांति
क्यूबा का राष्ट्रपति फुल्गेन्सियो बतिस्ता अमेरिकी पिट्ठू था। उसने अपने शासनकाल में (1951-1959) तक अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखा और आम जनता को नजरअंदाज किया। लोग भ्रष्टाचार, असमानता और अन्य तरह की परेशानियों से जूझ रहे थे। लगातार बढ़ते रोष के वजह से क्यूबा में क्रांति ने जन्म लिया। इसकी अगुआई फिदेल कास्त्रो और चे-ग्वारा कर रहे थे। 26 जुलाई, 1953 को क्यूबा क्रांति की शुरुआत हुई। दिसंबर 1958 को राष्ट्रपति बतिस्ता का तख्तापलट कर दिया गया। कास्त्रो ने क्यूबा का राष्ट्रपति बनते ही अमेरिकी विरोधी रुख अपनाया। वहीं, अमेरिका ने भी क्यूबा पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन कास्त्रो को कोई फर्क नहीं पड़ा। वे अपने देश को सारी मुसीबतों से निकाल लाए।
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Web Title: Cuba declares nine days of national mourning
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)