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महिलाओं के लिए नर्क से कम नहीं ये जगह, पाक सेना यहां ऐसे ढा रही जुल्म

dainikbhaskar.com | Nov 23,2016 10:48 AM IST
इंटरनेशनल डेस्क.पाकिस्तान में बलूच महिला आसी(26 साल)के मौत का मामला चर्चा में है। आसी बहुत ही खराब हालत में बलूचिस्तान के रिमोट एरिया से कराची के अस्पताल पहुंची थी। प्रेग्नेंसी के दौरान सही हेल्थकेयर फैसिलिटी न मिलने के चलते उसने दम तोड़ दिया। रिमोट एरिया से आने के चलते उसे पहले ही मेडिकल सुविधा नहीं मिली। कराची के अस्पताल पहुंचने के बाद भी ट्रीटमेंट के लिए डॉक्टर मौजूद नहीं थे। लिहाजा खराब हालत में महिला ने दम तोड़ दिया। ये सिर्फ एक आसी की ही कहानी नहीं। तकरीबन ऐसी स्थिति से बलूचिस्तान की ज्यादातर महिलाएं गुजर रही हैं। खराब मेडिकल फैसिलिटी के साथ ही ये अपने इलाकों में पाक सेना के भी अत्याचारों से सबसे ज्यादा जूझ रही हैं। इन्हें आएदिन रेप और किडनैपिंग का शिकार होना पड़ता है। ऐसे में हम यहां हर स्तर पर बलूचिस्तान में महिलाओं की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।आगे की स्लाइड्स में पढ़ें बलूच महिलाओं के लिए पाक फौज ने बना रखी हैं रेप सेल....
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प्रतीकात्मक फोटो।
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पाक फौज ने महिलाओं के लिए बना रखी हैं रेप सेल 
बलूचिस्तान में लोग हमेशा से पाकिस्तानी फोर्स के खिलाफ ह्यूमन राइट वॉयलेशन के मामले उठाते रहे हैं। खासकर महिलाएं इसकी सबसे ज्यादा शिकार हैं। दो महीने पहले एक मलोच महिला ने अपना नाम न जाहिर करने की शर्त पर मीडिया में इसे लेकर कई खुलासे किए थे। महिला ने बताया था कि पाकिस्तानी फोर्स ने रेप सेल बना रखी हैं। यहां महिलाओं को कैद कर रखा जाता है और बड़ी ही क्रूरता से उन्हें सेक्शुअली असॉल्ट किया जाता है। महिला ने ये भी बताया था कि इसी साल सितंबर में पाकिस्तानी फोर्स ने डेरा बुगती इलाके से 50 महिलाओं और बच्चे को अगवा किया था। बलूच महिला के मुताबिक, यहां से लगातार वकीलों, डॉक्टरों और टीचरों को अगवा किया जाता रहा है और फिर उनकी लाशें ही मिलती हैं। 
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कि़डनैपिंग, टॉर्चर और मर्डर है यहां आम बात
बलूचिस्तान में महिलाएं पाकिस्तानी सेना द्वारा रोजाना मारपीट, टॉर्चर, किडनैपिंग और मर्डर का शिकार होती हैं। एक्टिविस्ट नैला कादरी के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि नैला को पाकिस्तानी फोर्स ने किडनैप और टॉर्चर किया था। इसक दौरान वो 25 साल की बलूच स्कूल टीचर जरीना मारी के साथ हुए अत्याचार की चश्मदीद भी रहीं। जरीना को रेप सेल में रखा गया था। नैला ने रिहाई के बाद एशियन ह्यूमन राइट्स वॉट को इसकी रिपोर्ट भी दी थी। यहां एक्टिविस्ट बानुक करीमा बलोच और बानुक फरजाना माजिद लगातार महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। फरजाना ने दो हजार से ज्यादा की मौत और 20 हजार अगवा लोगों की सुरक्षित रिहाई के लिए मार्च भी निकाला था। फरजाना के मुताबिक, उनके अपने भाई को भी पाक इंटेलिजेंस एजेंट ने अगवा कर लिया था।
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पहले हमलों का डर, फिर स्कूल और टीचर्स की कमी
यहां महिलाओं की एजुकेशन पक्षपात से प्रेरित नीतियों का शिकार है। पहले तो आएदिन होने वाले हमलों के चलते लोग लड़कियों को घर से बाहर पढ़ने भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। इसके बाद जो निकलती भी हैं, उनका भी बेहतर सुविधाओं की कमी के एजुकेशन लेवल सुधर नहीं रहा। क्वेटा को छोड़ दिया जाए तो बलूचिस्तान के बाकी 29 में से किसी भी जिले में एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है। यहां के ग्रामीण इलाकों में गर्ल्स कॉलेज में महिला टीचरों की कमी है। मेल टीचर दिन भर ब्वॉएज कॉलेज में पढ़ाने के बाद शाम के वक्त गर्ल्स कॉलेज में अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे वक्त में लड़कियों का यहां तक पहुंचना ही संभव नहीं होता। क्योंकि इन इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन की भी सुविधा नहीं होती। लड़कियों को या तो कॉलेज छोड़ देना पड़ता है या फिर पूरे साल वो पढ़ने भी नहीं जा पातीं। एक सर्वे के मुताबिक, यहां महिला का लिटरेसी रेट सिर्फ 27 फीसदी है। इसमें भी ग्रामीण इलाकों  का महज 2 फीसदी है
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हॉस्पिटल भी नहीं पहुंच पातीं ज्यादातर महिलाएं
पाकिस्तान हेल्थ डेमोग्राफिक सर्वे के मुताबिक, मातृ मृत्यु-दर के मामले में बलूचिस्तान देश में पहले नंबर पर है। यहां शहरी इलाकों से ज्यादा दूरी, खराब कम्युनिकेशन सिस्टम और हेल्थ फैलिसिटी की कमी महिलाओं के लिए सबसे बड़ी दिक्कत है। यहां महिलाओं की एक बड़ी संख्या ऐसी रही, जो सही हेल्थ केयर की कमी के चलते प्रेग्नेंसी के दौरान ही जिंदगी की जंग हार जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, देश में एक लाख महिलाओं में से 785 महिलाओं की मौत के मामले अकेले बलूचिस्तान में ही सामने आए, जबकि पूरे देश में सिर्फ 272 मामले ही सामने आए। बलूच महिलाओं को कराची के अस्पतालों तक पहुंचने के लिए 700 किमी का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में कुछ तो अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पातीं। वहीं बाकी पारंपरिक दाई के भरोसे बच्चे पैदा करती हैं। 
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Web Title: Balochistan's women suffer in silence at worst place under Pakistan occupation
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)